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अध्याय 3

शिक्षा का संघर्ष

मेरे माता-पिता स्वयं कभी विद्यालय नहीं गए थे। वे पढ़ना-लिखना नहीं जानते थे, लेकिन शिक्षा के महत्व को भली-भाँति समझते थे।

हमारे क्षेत्र में उस समय अधिकांश बच्चे दसवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ देते थे। आर्थिक कठिनाइयाँ और आगे की शिक्षा की सुविधाओं का अभाव इसका मुख्य कारण था।

किन्तु मेरे माता-पिता ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद मेरी शिक्षा को रुकने नहीं दिया। उन्होंने अपने अनेक सुखों का त्याग किया, लेकिन मेरी पढ़ाई को आगे बढ़ाया।

उनके प्रेम, त्याग और प्रेरणा का परिणाम यह हुआ कि मैं अपने क्षेत्र का पहला स्नातक बना।

आज भी जब मैं अपनी उपलब्धियों के बारे में सोचता हूँ, तो सबसे पहले अपने माता-पिता का स्मरण करता हूँ। जो कुछ भी मैं हूँ, उसमें उनका बहुत बड़ा योगदान है।

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