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अध्याय 7

गुरु की खोज

मेरी माताजी अक्सर कहा करती थीं— “तू इतना भक्ति करता है, भगवान से अपने लिए अच्छी नौकरी क्यों नहीं माँगता?”

लेकिन न जाने क्यों बचपन से ही मेरे मन में संसार की वस्तुओं को माँगने की प्रवृत्ति नहीं थी।

मैंने धार्मिक ग्रंथों में पढ़ा था कि आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए सच्चे गुरु की आवश्यकता होती है। इसलिए मेरी प्रार्थना भी अलग थी।

मैं भगवान से धन, पद, प्रतिष्ठा या सुख नहीं माँगता था।

मेरी एक ही विनती होती थी— “हे प्रभु! मुझे सच्चे गुरु की प्राप्ति करा दो।”

उस समय मुझे नहीं पता था कि यह प्रार्थना कब और कैसे पूरी होगी, लेकिन भीतर अटूट विश्वास था कि परमात्मा मेरी पुकार अवश्य सुनेगा।

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