एक प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी मिलने के बाद मेरा संपर्क एक ऐसे सहकर्मी से हुआ जो एक संत से दीक्षित था। उसके जीवन में एक विशेष प्रकार की शांति और स्थिरता दिखाई देती थी।
उसे देखकर मेरे भीतर गुरु प्राप्ति की इच्छा और तीव्र हो गई।
कुछ समय बाद मुझे सत्संग सुनने का अवसर मिला। संत की वाणी मेरे हृदय को भीतर तक छूती चली गई। सत्संग के दौरान ध्यान कराया गया और उसी अवसर पर मुझे गुरु की महिमा तथा गुरु-दीक्षा के महत्व का गहरा अनुभव हुआ।
सत्संग समाप्त होने के बाद गुरु जी की कृपादृष्टि मुझ पर पड़ी। वह क्षण मेरे जीवन की दिशा बदलने वाला था।