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अध्याय 9

स्वप्न में दर्शन

पहले सत्संग के बाद मेरे भीतर सतगुरु के प्रति आदर और प्रेम उत्पन्न हो चुका था। उसी रात एक अद्भुत स्वप्न आया।

स्वप्न में मैंने संत ठाकुर सिंह जी के दर्शन किए और उनसे दीक्षा की विनती की। उन्होंने मुझे सिमरन के पाँच अक्षर दिए।

सुबह उठने पर मैं आश्चर्यचकित था, लेकिन वे पाँच अक्षर मुझे याद नहीं रहे।

यह घटना मेरे लिए रहस्य भी थी और भीतर से गुरु के प्रति खिंचाव का कारण भी।

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